श्रावण सोमवार व्रत
सावन मास भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, और इसके सोमवार के व्रत आध्यात्मिक शुद्धि और शिव कृपा प्राप्ति का उत्तम माध्यम हैं। यह व्रत मन की शांति और भक्ति को प्रगाढ़ करने के लिए किया जाता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन से निकले विष को भगवान शिव ने धारण किया था, जिसके ताप को शांत करने हेतु भक्तों ने उन पर शीतल जल अर्पण किया। इसी श्रद्धा भाव को व्यक्त करने के लिए सावन सोमवार का व्रत रखा जाता है ताकि महादेव का आशीर्वाद प्राप्त हो सके।
- 1प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
- 2शिवलिंग का गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी से पंचामृत अभिषेक करें।
- 3बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद फूल और अक्षत (चावल) अर्पित करें।
- 4शिव चालीसा या 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करते हुए धूप-दीप दिखाएं।
- 5व्रत कथा का श्रवण करें और अंत में कपूर से शिव आरती करें।
- 1पूरे दिन उपवास रखें या केवल एक समय फलाहार ग्रहण करें।
- 2तामसिक भोजन, प्याज, लहसुन और मदिरा का पूरी तरह त्याग करें।
- 3क्रोध और नकारात्मक विचारों से बचकर मौन या शिव नाम का सुमिरन करें।
भगवान शिव को पंचामृत, मखाने की खीर और ऋतु फलों का भोग लगाया जाता है। भक्त व्रत खोलने के लिए सात्विक भोजन का प्रयोग करते हैं।
ॐ नमः शिवाय - मैं उस मंगलकारी और परमेश्वर शिव को सादर नमन करता हूँ।
इस व्रत से भक्तों की समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। यह मानसिक शांति प्रदान करता है और चंद्र दोष जैसे कुंडली दोषों के निवारण में सहायक है।