राम नवमी
राम नवमी भगवान विष्णु के सातवें अवतार श्री राम का जन्मोत्सव है, जो अधर्म पर धर्म की विजय और मानवीय मर्यादाओं के पालन का प्रतीक है। यह पर्व चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाया जाता है और भक्तों को सत्य व धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
त्रेतायुग में अयोध्या के राजा दशरथ की कोई संतान नहीं थी, तब उन्होंने पुत्र प्राप्ति के लिए पुत्रकामेष्टि यज्ञ करवाया। यज्ञ के प्रसाद स्वरूप चैत्र शुक्ल नवमी के दिन रानी कौशल्या की कोख से भगवान श्री राम ने जन्म लिया। प्रभु का यह अवतार दुष्ट रावण के वध और पृथ्वी पर धर्म की स्थापना के उद्देश्य से हुआ था।
- 1प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
- 2पूजा घर में श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी की प्रतिमा स्थापित करें।
- 3भगवान का गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें।
- 4अक्षत, पुष्प, धूप, दीप और गंध अर्पित करें।
- 5श्री रामचरितमानस या रामायण के बालकांड का पाठ करें।
- 6अंत में कपूर से आरती करें और जयकारे लगाएं।
- 1पूरे दिन निराहार या फलाहार रहकर उपवास का पालन करें।
- 2ब्रह्मचर्य का पालन करें और मन में शुद्ध विचार रखें।
- 3अन्न, तामसिक भोजन और व्यसनों का पूर्ण त्याग करें।
- 4दिन भर 'श्री राम' नाम का जप और कीर्तन करें।
श्री राम को धनिए की पंजिरी, पंचामृत, तुलसी दल और केसरिया हलवे का भोग लगाया जाता है। साथ ही मौसमी फल और बताशे भी प्रसाद के रूप में वितरित किए जाते हैं।
ॐ रां रामाय नमः - इस मंत्र का अर्थ है मैं भगवान श्री राम को सादर नमन करता हूँ और उनकी शरण स्वीकार करता हूँ।
राम नवमी के पूजन से साधक को मानसिक शांति, साहस और धैर्य की प्राप्ति होती है। यह व्रत घर में सुख-समृद्धि लाता है और जीवन के समस्त कष्टों व नकारात्मक ऊर्जा का नाश करता है।