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रक्षा बंधन

महत्व

रक्षा बंधन भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का प्रतीक है। यह पर्व केवल धागे का बंधन नहीं, बल्कि भाई द्वारा बहन की रक्षा के संकल्प और आध्यात्मिक सुरक्षा का पावन उत्सव है।

कथा

पौराणिक कथा के अनुसार जब भगवान कृष्ण की उंगली सुदर्शन चक्र से कट गई थी, तब द्रौपदी ने अपनी साड़ी का पल्लव फाड़कर उनकी उंगली पर बांध दिया था। श्री कृष्ण ने इस उपकार के बदले द्रौपदी को हर संकट में रक्षा करने का वचन दिया और चीरहरण के समय उनकी लाज बचाई। इसी रक्षा के वचन की स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है।

पूजा विधि
  1. 1स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा की थाली सजाएं।
  2. 2थाली में राखी, रोली, अक्षत, दीपक और मिठाई रखें।
  3. 3भाई के माथे पर कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाएं।
  4. 4भाई की दाईं कलाई पर मंत्रोच्चार के साथ रक्षा सूत्र बांधें।
  5. 5भाई की आरती उतारें और उसकी लंबी उम्र की कामना करें।
  6. 6भाई को मिठाई खिलाएं और भाई से रक्षा का वचन व उपहार लें।
व्रत नियम
  1. 1राखी बांधने तक भाई और बहन दोनों को निराहार रहना चाहिए।
  2. 2भद्रा काल के दौरान राखी बांधना पूर्णतः वर्जित माना जाता है।
  3. 3राखी बांधते समय भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
  4. 4पूजा में केवल सात्विक सामग्री का उपयोग करें और काले रंग से बचें।
प्रसाद

इस दिन मुख्य रूप से घेवर, खीर या घर में बनी शुद्ध मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। भाई को मिष्ठान खिलाकर संबंधों में मधुरता का संचार किया जाता है।

मंत्र

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामनुबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥ अर्थ: जिस रक्षासूत्र से दानवेंद्र राजा बलि को बांधा गया था, उसी से मैं तुम्हें बांधती हूं; हे रक्षा सूत्र तुम स्थिर रहना।

लाभ

यह पर्व पारिवारिक एकता और आपसी सौहार्द को सुदृढ़ बनाता है। आध्यात्मिक रूप से यह रक्षा सूत्र व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा से बचाता है और आत्मविश्वास में वृद्धि करता है।

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