शारदीय नवरात्रि
यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत और शक्ति की उपासना का प्रतीक है। अश्विन मास में मनाया जाने वाला यह त्यौहार मां दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित है, जो भक्तों में आत्मशक्ति और भक्ति का संचार करता है।
महिषासुर नामक असुर ने स्वर्ग पर अधिकार कर लिया था, तब ब्रह्मा, विष्णु और महेश के तेज से मां दुर्गा का प्राकट्य हुआ। मां ने नौ दिनों तक भीषण युद्ध के बाद दसवें दिन महिषासुर का वध किया, जिसे विजयदशमी के रूप में मनाया जाता है।
- 1कलश स्थापना और अखंड ज्योत प्रज्वलित करना।
- 2मां दुर्गा की मूर्ति को स्नान कराकर श्रृंगार करना।
- 3धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करना।
- 4दुर्गा सप्तशती का पाठ या देवी कवच का जाप करना।
- 5प्रतिदिन कन्या पूजन और आरती करना।
- 6अंतिम दिन हवन के साथ पूजा संपन्न करना।
- 1सात्विक भोजन ग्रहण करें और अन्न का त्याग करें।
- 2ब्रह्मचर्य का पालन करें और सादगी से रहें।
- 3क्रोध, झूठ और तामसिक प्रवृत्तियों से दूर रहें।
- 4फलाहार और जल का उचित सेवन करें।
मां को हलवा, पूरी और चने का विशेष भोग लगाया जाता है। इसके अतिरिक्त मेवे, फल और दूध से बनी मिठाइयों का अर्पण किया जाता है।
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे - यह महामंत्र मां के शक्तिशाली स्वरूप की आराधना और चेतना जागृति के लिए है।
इस व्रत से मानसिक शांति, आत्म-शुद्धि और नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है। भक्तों को मां की कृपा से सुख, समृद्धि और जीवन के संघर्षों पर विजय प्राप्त होती है।