करवा चौथ
करवा चौथ सुहागिन महिलाओं का प्रमुख त्योहार है, जो पति की लंबी आयु और वैवाहिक सुख के लिए मनाया जाता है। यह प्रेम, त्याग और अटूट विश्वास का प्रतीक है, जिसमें शिव-पार्वती की उपासना से दांपत्य जीवन में मधुरता आती है।
पौराणिक कथा के अनुसार, वीरवती नाम की पतिव्रता स्त्री ने छल से व्रत तोड़ने के कारण अपने पति को खो दिया था। उसकी अटूट भक्ति देख माता पार्वती ने प्रसन्न होकर उसके पति को पुन: जीवित कर दिया। तब से सुहागिनें अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए यह कठिन निर्जला व्रत रखती हैं।
- 1ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सरगी ग्रहण करें और निर्जला व्रत का संकल्प लें।
- 2संध्याकाल में शिव-पार्वती, कार्तिकेय और गणेश जी की विधि-विधान से पूजा करें।
- 3करवा माता की तस्वीर के समक्ष दीपक जलाएं और करवा चौथ की व्रत कथा सुनें।
- 4मिट्टी के करवे में जल और सिक्के भरकर रखें और उस पर तिलक लगाएं।
- 5चंद्रमा के उदय होने पर अर्घ्य दें और छलनी के माध्यम से चंद्र दर्शन करें।
- 6पति के हाथों से जल ग्रहण कर और आशीर्वाद लेकर व्रत का पारण करें।
- 1सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक बिना अन्न और जल के निर्जला व्रत रखें।
- 2पूजा के दौरान लाल या पीले रंग के पारंपरिक वस्त्र और पूर्ण श्रृंगार धारण करें।
- 3व्रत के दिन तामसिक भोजन से दूर रहें और मन में सात्विक विचार बनाए रखें।
- 4सुहाग की सामग्री जैसे चूड़ी, बिंदी और सिंदूर का दान करना अत्यंत शुभ है।
भगवान को पूरी, हलवा, खीर और मालपुआ का विशेष भोग लगाया जाता है। साथ ही मीठे करवे और मेवों का प्रसाद वितरित किया जाता है।
ॐ शिवायै नमः, ॐ नमः शिवाय - अर्थ: मैं शक्ति स्वरूपा पार्वती और कल्याणकारी भगवान शिव को नमन करती हूँ।
इस व्रत से पति की आयु लंबी होती है और वैवाहिक जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं। यह आध्यात्मिक शक्ति प्रदान करता है और घर में सुख, शांति तथा अटूट प्रेम की स्थापना करता है।