हनुमान जयंती
हनुमान जयंती भगवान शिव के 11वें रुद्रावतार श्री हनुमान के जन्मोत्सव का पावन पर्व है। यह दिन अटूट भक्ति, अपार शक्ति और निस्वार्थ सेवा का प्रतीक है, जो भक्तों को साहस और आत्मसंयम की प्रेरणा प्रदान करता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, माता अंजना और वानर राज केसरी ने संतान प्राप्ति हेतु कठिन तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर वायु देव के आशीर्वाद और भगवान शिव के अंश से चैत्र पूर्णिमा को हनुमान जी का जन्म हुआ। उन्होंने बचपन में सूर्य को फल समझकर निगलने का प्रयास किया था और आगे चलकर वे भगवान राम के परम भक्त और संकटमोचक कहलाए।
- 1प्रातःकाल स्नान कर लाल वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
- 2हनुमान जी की प्रतिमा को गंगाजल से शुद्ध कर सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें।
- 3लाल फूल, अक्षत, धूप और दीपक जलाकर पूजन प्रारंभ करें।
- 4हनुमान चालीसा, बजरंग बाण या सुंदरकांड का श्रद्धापूर्वक पाठ करें।
- 5प्रभु को चोला चढ़ाएं और अंत में विधि-विधान से आरती करें।
- 1व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का कड़ाई से पालन करें।
- 2तामसिक भोजन, मांस, मदिरा और लहसुन-प्याज का पूर्ण त्याग करें।
- 3दिन भर प्रभु का स्मरण करें और क्रोध या अपशब्दों से बचें।
- 4संभव हो तो पूजन के दौरान लाल रंग के वस्त्र ही धारण करें।
हनुमान जी को मुख्य रूप से बूंदी के लड्डू, बेसन के लड्डू या रोट का भोग लगाया जाता है। अर्पण करते समय तुलसी दल अवश्य रखें क्योंकि इसके बिना भोग पूर्ण नहीं माना जाता।
ॐ हनुमते नमः। अर्थ: मैं पवनपुत्र श्री हनुमान जी को नमस्कार करता हूँ और उनके चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित करता हूँ।
इस दिन विधि-विधान से पूजन करने पर मंगल और शनि दोषों का प्रभाव समाप्त होता है। भक्त को अदम्य साहस, भय से मुक्ति और मानसिक शांति प्राप्त होती है, जिससे जीवन के सभी बड़े संकटों का निवारण होता है।