दशहरा (विजयादशमी)
दशहरा अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। यह पर्व अहंकार के विनाश और सत्य की शक्ति के उदय का संदेश देता है, जो जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करता है।
पौराणिक कथा के अनुसार, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने लंका के असुर राजा रावण का वध कर माता सीता को मुक्त कराया था। नौ दिनों तक चले भीषण युद्ध के बाद दशमी तिथि को अधर्मी रावण का अंत हुआ, इसलिए इसे विजयादशमी कहा जाता है।
- 1ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
- 2भगवान राम, माता सीता और हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित कर पूजन करें।
- 3शमी वृक्ष की विशेष पूजा करें और उसकी पत्तियां घर लाएं।
- 4शस्त्रों, वाहनों और औजारों की साफ-सफाई कर उनका तिलक करें।
- 5अक्षत, पुष्प, धूप और दीप से आरती उतारें।
- 6रावण दहन के बाद बड़ों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।
- 1पूरे दिन सात्विक भोजन ग्रहण करें और तामसिक आहार से बचें।
- 2क्रोध, ईर्ष्या और झूठ का त्याग कर मन को शांत रखें।
- 3विजया मुहूर्त में पूजा संपन्न करना अत्यंत शुभ होता है।
- 4घर में अखंड ज्योति जलाएं और श्री रामचरितमानस का पाठ करें।
दशहरे पर भगवान राम को बेसन के लड्डू और खीर का भोग लगाया जाता है। कई स्थानों पर पान का बीड़ा अर्पित करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
श्री राम रामाय नमः - भगवान राम को मेरा सादर प्रणाम, जो समस्त सुखों और धर्म के आधार हैं।
इस दिन पूजा करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। यह पर्व आत्मविश्वास में वृद्धि करता है और पारिवारिक सुख-समृद्धि के द्वार खोलता है।