दीपावली
दीपावली अंधकार पर प्रकाश, अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का महापर्व है। यह उत्सव आत्मिक शुद्धि और माता लक्ष्मी के स्वागत का प्रतीक है, जो जीवन में सुख-समृद्धि लाती हैं।
पौराणिक कथा के अनुसार, इस दिन भगवान श्री राम 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या लौटे थे, जिनके स्वागत में नगरवासियों ने दीप प्रज्वलित किए थे। एक अन्य मान्यता के अनुसार, इसी दिन समुद्र मंथन के दौरान माता लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था। इसीलिए दिवाली की रात को सुख-संपत्ति की अधिष्ठात्री देवी लक्ष्मी की विशेष पूजा का विधान है।
- 1पूजा स्थल को शुद्ध कर लाल कपड़ा बिछाएं और लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा स्थापित करें।
- 2कलश स्थापना करें और मूर्तियों को गंगाजल व पंचामृत से स्नान कराएं।
- 3देवी को कुमकुम, अक्षत, कमल के फूल और वस्त्र अर्पित करें।
- 4घी का अखंड दीपक जलाकर श्री सूक्त या लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें।
- 5अंत में कपूर से आरती करें और पूरे घर में दीप जलाएं।
- 1पूरे दिन सात्विक आहार लें और मन में शुद्ध विचार रखें।
- 2घर के मुख्य द्वार और कोने-कोने में पूर्ण स्वच्छता बनाए रखें।
- 3संध्या काल में लक्ष्मी पूजन तक उपवास रखें और फिर फलाहार करें।
- 4क्रोध, विवाद और किसी भी प्रकार के अपमानजनक शब्दों से दूर रहें।
माता लक्ष्मी को केसरिया खीर, सफेद रंग की मिठाइयां और बताशे का भोग लगाएं। साथ ही खील-मखाने और मौसमी फल अर्पित करना अत्यंत शुभ होता है।
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम:॥ अर्थ: हे माँ लक्ष्मी, आप मुझ पर प्रसन्न होकर मुझे सुख और समृद्धि प्रदान करें।
दीपावली पूजन से घर से दरिद्रता का नाश होता है और स्थायी सुख-संपत्ति का वास होता है। यह आध्यात्मिक शांति प्रदान करने के साथ-साथ परिवार में एकता और सौभाग्य में वृद्धि करता है।