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Santoshi

संतोषी माता आरती

आरती
जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता।
अपने सेवक जन को, सुख सम्पति दाता॥
जय संतोषी माता...

सुंदर रूप मनोहर, छवि न्यारी प्यारी।
कुल भूषण जग जननी, कीर्ति है भारी॥
जय संतोषी माता...

कर मय कंचन थाल, चंदन अक्षत धूप।
निर्मल दीप जलाकर, आरती करूं अनूप॥
जय संतोषी माता...

ध्यान धरे जो तेरा, मनवांछित फल पावे।
दुख दरिद्र मिट जावे, सुख संपति आवे॥
जय संतोषी माता...

शुक्रवार व्रत राखे, जो कोई नर नारी।
संतोषी मां की कृपा से, मिटे विपत्ति भारी॥
जय संतोषी माता...

गुड़ और चना का भोग, तुमको अति भावे।
श्रद्धा भक्ति से जो, चरणों में शीश नवावे॥
जय संतोषी माता...

भक्ति भाव जो साधे, मां का गुण गावे।
भव सागर से तरकर, परम पद पावे॥
जय संतोषी माता...

जय संतोषी माता, मैया जय संतोषी माता।
अपने सेवक जन को, सुख सम्पति दाता॥
अर्थ

यह आरती माता संतोषी की दिव्य महिमा और उनके सौम्य स्वरूप का वर्णन करती है। इसमें भक्त माता से अपने जीवन के दुख और दरिद्रता को दूर कर सुख-शांति प्रदान करने की प्रार्थना करते हैं। यह आरती हमें जीवन में धैर्य रखने और हर परिस्थिति में संतोषी बने रहने की आध्यात्मिक सीख देती है।

कब गाएँ

विशेष रूप से शुक्रवार के व्रत के दौरान और प्रतिदिन सुबह-शाम पूजा के समय।

लाभ

इस आरती के गायन से भक्तों के जीवन में मानसिक शांति आती है और आर्थिक बाधाएं दूर होती हैं। माता की कृपा से परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है और सभी कष्टों का निवारण होता है।

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सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु, मा कश्चिद्दुःखभाग् भवेत्॥

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